उझानी (बदायूं)। उझानी ब्लॉक के गांव बुटला दौलत में मनरेगा योजना के नाम पर बड़ा घोटाला सामने आया है। तालाब निर्माण की आड़ में स्कूल और किसान की जमीन से 20 फीट से अधिक गहराई तक मिट्टी खनन कर उसे हाईवे निर्माण में बेचने का आरोप लगा है। शिकायत के बाद अब मामला जांच के दायरे में आ गया है।
गांव निवासी किसान राजवीर पुत्र रामकिशोर ने आरोप लगाया है कि उनके खेत (गाटा संख्या 1384) के पास स्थित आदर्श जूनियर हाईस्कूल (गाटा संख्या 1382) की करीब पांच बीघा जमीन पर जेसीबी से गहरी खुदाई की गई। इस दौरान उनके खेत की भी मिट्टी निकाल ली गई, जिससे जमीन पूरी तरह बंजर हो गई है। किसान का कहना है कि वह पिछले दो वर्षों से खेती नहीं कर पा रहे हैं, जबकि खेती ही उनके परिवार की आजीविका का मुख्य साधन है।
किसान रामकिशोर ने बताया कि जमीन को दोबारा खेती योग्य बनाने में भारी खर्च आएगा। उन्होंने पहले बीडीओ से शिकायत की, लेकिन सुनवाई न होने पर मनरेगा लोकपाल से गुहार लगाई।
शुक्रवार को मनरेगा लोकपाल नवीन कुमार खुद मौके पर पहुंचे और स्थिति का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। लेखपाल से रिपोर्ट मांगी गई है और रोजगार सेवक से भी जानकारी ली जा रही है।

इस मामले में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आ रही हैं। नियमों के अनुसार तालाब निर्माण से पहले भूमि की पैमाइश और भूमि प्रबंधन समिति की रिपोर्ट जरूरी होती है, लेकिन यहां ऐसा कोई प्रक्रिया पालन नहीं किया गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जमीन ग्राम समाज की नहीं थी तो वहां मनरेगा के तहत कार्य कैसे कराया गया।
इतना ही नहीं, जेसीबी मशीन से खुदाई कर मनरेगा के मूल उद्देश्य—ग्रामीणों को रोजगार देने—को भी दरकिनार किया गया। वहीं रोजगार सेवक तालेबर सिंह ने इस काम से पूरी तरह अनभिज्ञता जताई है।
अब सवाल उठता है कि आखिर किसकी मिलीभगत से यह अवैध खनन हुआ और क्या जांच के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा।