Shadow

बदायूं-शेखुपुर विधानसभा के गाँव शेखुपुर सकरी जंगल में भी वोट काटने का खेल,फार्म सात का गलत प्रयोग पर लगाया अरौप

शेखुपुर विधानसभा में कुल 490 मतदान स्थल हैं। कई बूथों पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम काटने के लिए फॉर्म-7 दाखिल किए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि इन फॉर्मों में आवेदक के रूप में एक ही नाम भगवान सिंह दर्ज है। फॉर्म-7 में आपत्ति का कारण अधिकांश मामलों में ‘पहले से नामांकित’ या ‘अनुपस्थित’ दर्शाया गया है, यानी संबंधित मतदाताओं को या तो गैर-स्थानीय बताया जा रहा है या कहीं और का मतदाता। जबकि बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता हैं, जिनका एसआईआर के दौरान बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन किया जा चुका है और दस्तावेज भी जमा कराए गए थे।

20 बूथों पर 2500 से अधिक आपत्तियां

सिर्फ 20 बूथों पर ही करीब 2500 से अधिक आपत्तियां सामने आई हैं। इनमें बूथ संख्या 8, 15, 19, 20, 23, 24, 241, 242, 376 से 385 तक के बूथ प्रमुख हैं। बूथ संख्या 19, 20, 241 और 242 पर अकेले 250-285 तक आपत्तियां दर्ज की गई हैं।

मतदाताओं ने उठाए सवाल

बूथ संख्या 19 के मतदाता सालिम ने बताया कि उनकी मां, भाई और भांजी के वोट पर आपत्ति लगा दी गई है, जबकि पूरा परिवार वर्षों से शेखुपुर में रह रहा है।
बूथ संख्या 23 के प्यारे मियां ने कहा कि शालू खान का वोट पिछले कई चुनावों से दर्ज है, फिर भी आपत्ति लगा दी गई। मोहम्मद इंजमाम उल अली, मुन्ने खां, सना, मोहम्मद शिवली और तौफीक ने भी एसआईआर पूरा होने के बावजूद वोट पर आपत्ति लगाए जाने को गलत बताया।

बीएलओ और जनप्रतिनिधि भी निशाने पर

बूथ संख्या 19, 20, 24 और 380 की बीएलओ रऊफा खातून, राबिया बेगम, शगुफ्ता और हूर बानो के वोट पर भी आपत्तियां दर्ज होने की बात सामने आई। यही नहीं, बूथ संख्या 384 की बीएलओ शमशुल आफरीन के परिजनों के वोट पर भी आपत्ति लगाई गई है।

इसके अलावा ककराला नगर पालिका के वार्ड संख्या 5 के निर्वाचित सदस्य ज़ैनुल आब्दीन ख़ान के नाम पर भी फॉर्म-7 दाखिल किया गया है। ख़ान 2017 से निर्वाचित सदस्य हैं और 2012 से मतदाता हैं। पूर्व प्रधान दिलशाद के दो भाइयों के वोट पर भी आपत्ति दर्ज कराई गई है।

सपा ने जताया विरोध

सपा जिलाध्यक्ष आशीष यादव ने कहा कि एसआईआर के दौरान बीएलओ सत्यापन कर चुके हैं और अनंतिम सूची जारी हो चुकी है। इसके बाद एक ही व्यक्ति द्वारा सैकड़ों मतदाताओं पर आपत्ति लगाना पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बनाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों से मताधिकार छीना जा रहा है और चुनाव आयोग खामोश है। पार्टी ने इस संबंध में प्रशासन और शीर्ष नेतृत्व से शिकायत की है।

क्या बोले एसडीएम

सदर एसडीएम मोहित सिंह ने कहा कि दावा-आपत्ति की अवधि एक महीने की है। हर आपत्ति की जांच बीएलओ करेगा। मतदाता को नोटिस देकर उसकी बात सुनी जाएगी। केवल आपत्ति के आधार पर किसी का नाम नहीं काटा जाएगा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!